Wednesday, September 29, 2010

एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों

रहनुमाओं की अदा पर है फ़िदा ये दुनिया यारों 
इस बहकती दुनिया को संभालो यारों |
कौन कहता है नहीं होगा आसमाँ में सुराख़
एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों ||

2 comments:

Anonymous said...

bahut hi sundar aur prerak panktiyan hai

Anonymous said...

vah vah dheraj ji