Monday, July 11, 2011

Bhartendu Harishchandra


"....खड़ीबोली दो विभिन्न रूपों में सारे प्रान्तों में बोली जाती है । जब उसमें फारसी शब्दों का प्रचुर प्रयोग किया जाता है और वह फारसी लिपि में लिखी जाती है तो वह उर्दू कहलाती है, जब वह बाह्य मिश्रण से अछूती  होती है और नागरी लिपि में लिखी जाती है, तब वह हिंदी कहलाती है।
---- भारतेंदु हरिश्चन्द्र

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