Monday, October 10, 2011

Learn Hindi


  • Bad = बुरा buraa
  • Friend = मित्र (mitra) (friend neutral gender) यार (yaar) (close friend) दोस्त dost (male friend) सहेली saheli (female friend). [Note: usually दोस्त is used by men to address another man, सहेली is man's girl friend, यार is girl's boy friend.]
  • What is your name? = आपका नाम क्या है? aapka naam kya hai? [This is used to address a persn with respect e.g. an older or unknown person. Similar to vous in French or usted in Spanish.] तुम्हारा नाम क्या है? Tumhara naam kya hai [This is used to address a younger person or a close friend. Similar to Tu in French and Spanish.]
  • Nice to meet you. = आपसे मिलकर खुशी हुई aapse milkar khushii huyii
  • Birthday = जन्मदिन janmadin [जन्म (Janma means
  • birth; din means day )
  • Happy Birthday! = जन्मदिन मुबारक हो । janmadin
  • mubaarak ho OR जन्मदिन की शुभकामनाएँ! janmadin ki shubhkaamnaayehn
  • Tomorrow/Yesterday = कल kal (Hindi does not have seperate words for yesterday and tomorrow, the meaning is determined from the context that the word is used; if the context cannot be determined from the tense of the verb, longer expressions could be used: tomorrow = आनेवाला कल aanevaalaa kal, yesterday = बीता हुआ कल beetaa huaa kal)
  • Would you like to eat something? = क्या आप कुछ खाना पसंद करेंगे? = Kyaa aap kuchh khaanaa pasand karenge?
  • My name is = मेरा नाम _____ है Mera naam _____ hai
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Sunday, October 9, 2011

Learn Hindi


  • You are welcome [as in welcome to our home] = आपका स्वागत है। (aapkaa svaagat hai)
  • Hello = नमस्ते (namasté)
  • How are you? = आप कैसे हैं? (aap kaisé hain?) [hai is pronounced nasally like in "hand"]
  • Goodbye = अलविदा (alvida) (also नमस्ते, namaste) (also फिर मिलेंगे phir milenge and the reply is ज़रूर मिलेंगे zaroor milenge)
  • Thank you = धन्यवाद dhanyavaad or शुक्रिया shukriya
  • Thank you very much = आपका बहुत बहुत धन्यवाद (aapkaa bahut bahut dhanyavaad)
  • Please = कृपया (kripyaa [most people just say please or add zara into the sentence])
  • Excuse me = क्षमा/माफ़ करें kshamaa/maaf karén (क्षमा and माफ़ are synonyms)
  • Good = अच्छा achchhaa

Tuesday, September 20, 2011

hindi sikhen: Bhartiya Sanskriti : Amar Sanskriti

hindi sikhen: Bhartiya Sanskriti : Amar Sanskriti

Bhartiya Sanskriti : Amar Sanskriti


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विश्व में अनेक संस्कृतियाँ पनपी और मिट गई। आज उनका कहीं नामोंनिशान तक नहीं है, सिर्फ उनकी स्मृति बाकी है, लेकिन भारतीय संस्कृति में है ऐसा कुछ कि वह कुछ नहीं मिटा। उसे मिटाने के बहुत प्रयास हुए और यह सिलसिला आज भी जारी है, पर कुछ बात है कि हस्ती, मिटती नहीं हमारी। भारतीय संस्कृति में आखिर क्या है, जो उसे हमेशा बचाए रखता है, जिसकी वजह से वह हजारों साल से विदेशी हमलावरों से लोहा लेती रही और इन दिनों इन पर जो हमले हो रहे हैं, उसका मुकाबला कर रही है ? आखिर कैसा है वह भारतीय संस्कृति का वह तंत्र, जिसे हमलावार संस्कृतियाँ छिन्न-भिन्न नहीं कर पातीं ? हर बार उन्हें लगता है कि इस बार वे इसे अवश्य पदाक्रांत कर लेंगी, पर हुआ हमेशा उलटा है, वे खुद ही पदाक्रांत होकर भारतीय संस्कृति में विलीन हो गईं, क्यों और कैसे ?
हजारों साल तक क्यों और कैसे जीवित है भारतीय संस्कृति; क्या हैं इसके मूल तत्व, जो इसे नष्ट होने से हमेशा बचाते और विरोधी संस्कृतियों का मुकाबला करने की शक्ति देते रहे है; किन-किन संस्कृतियों ने कब-कब और किस-किस रूप में भारतीय संस्कृति पर हमले किये और कैसे तथा किस रूप में वे पराजित हुई; भारत में पनपी इस संस्कृति ने कैसे एशिया, यूरोप और अफ्रीका के बड़े भूभाग को अपने प्रभाव में ले लिया! क्यों सिर्फ देह की शक्ति को महत्वपूर्ण मानने वाला स्पार्टा वीरों के लिए भले ही जाना गया, मगर विश्व की संस्कृतियों पर वह कोई प्रभाव नहीं डाल सका ! वहाँ मनुष्य के मन को भारतीय संस्कृति जितना महत्त्व नहीं दिया गया, शायद इसीलिए रोम, मिस्त्र और काबुल आदि की प्राचीन संस्कृतियाँ नष्ट हो गईं।
भारतीय संस्कृति पर फिर हमला हो रहा है और इस बार वह हमला बहुस्तरीय है-वह देह के स्तर पर तो है ही, मन के स्तर पर भी है बहुराष्ट्रीय कंपनियों के द्वारा अनेक टी.वी. चैनलों के जरिए जो हमला किया जा रहा है, वह बेहद चतुराई और निर्लज्जता से भरा है, जिससे लड़ने का जो हमारा तंत्र है, इसके आगे स्वतः नतमस्तक हो गया है। प्लासी का युद्ध हम हारे नहीं थे, हमारे सेनापति विदेशियों से मिल गए और बिना लड़े ही हम गुलाम हो गए थे। यही खतरा आज भी हमारे सामने है। उस बार राज्य दे दिया गया था, लेकिन इस बार राज्य के साथ संस्कृति भी दाँव पर लगी हुई है।
भारतीय संस्कृति वस्तुतः आज गहरे संकट में है और यही संकट आज तक के इतिहास का सबसे बड़ा संकट है। इससे पहले भारतीय संस्कृति इस तरह सार्वदेशिक हमलों का शिकार कभी नहीं हुई। हमलावार आते रहे और भाग जाते रहे या फिर यहीं पर रच-पच जाते रहे, पर इस बार वे यहाँ आये नहीं है। इस बार हमारी संस्कृति पर वे हमारे अपनों से ही हमला करवा रहे हैं और हम अर्जुन की तरह विषाद में घिर गए हैं कि इन्हें कैसे मारें। हमारे सामने तो हमारे अपने ही खड़े हैं ऐसे ही कठिन समय के लिए शायद भारतीय मनीषा ने ‘श्रीमद्भगवत् गीता’ जैसे ग्रंथ की रचना की है, जिसके जरिये अर्जुन को धर्म का पालन और संस्कृति की रक्षा करने के लिए सन्नद्ध किया जा सकता है।


Saturday, August 20, 2011

Gandhi to Sonia

एक दिन सोनिया गांधी के सपने में महात्मा गांधीजी आकर बोले, "मैने मरते समय कॉंग्रेस को सादगी, ईमानदारी, टोपी, चश्मा और डंडा दिया था, कहॉं है वो?" सोनिया ने अत्यंत विनम्रतासे कहा, "टोपी तो राहुल लोगोंको पहना रहा है. सादगी मेरे और प्रियंका के पास है. चश्मा मनमोहन के पास है. ईमानदारी स्विस और ईटली के बैंक में सेफ है और डंडा आम आदमी की सेवा में लगा रखा है.

Monday, July 11, 2011

Bhartendu Harishchandra


"....खड़ीबोली दो विभिन्न रूपों में सारे प्रान्तों में बोली जाती है । जब उसमें फारसी शब्दों का प्रचुर प्रयोग किया जाता है और वह फारसी लिपि में लिखी जाती है तो वह उर्दू कहलाती है, जब वह बाह्य मिश्रण से अछूती  होती है और नागरी लिपि में लिखी जाती है, तब वह हिंदी कहलाती है।
---- भारतेंदु हरिश्चन्द्र